नीति आयोग में CM साय का बड़ा विजन: बस्तर के लिए सरकार का मेगा रोडमैप – दूध, खेतों तक पानी, युवाओं को काम और गांवों को नई पहचान देने की तैयारी
डेयरी क्रांति, 32 हजार हेक्टेयर सिंचाई, पर्यटन विस्तार और तीन साल में परिवारों की आय 30 हजार रुपये मासिक करने का लक्ष्य

नई दिल्ली/रायपुर। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में बस्तर के विकास का बड़ा रोडमैप पेश करते हुए स्पष्ट किया कि नक्सलवाद की पहचान से बाहर निकलकर बस्तर अब आर्थिक विकास, पर्यटन, कृषि और रोजगार का नया केंद्र बनेगा। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ का विजन रखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अगले तीन वर्षों में बस्तर के प्रत्येक परिवार की औसत मासिक आय 30 हजार रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। वर्तमान में क्षेत्र के लगभग 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। इस स्थिति को बदलने के लिए कृषि, पशुपालन, वन उपज, लघु उद्योग और स्वरोजगार आधारित योजनाओं पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
बस्तर में डेयरी मॉडल, हर गांव में आय का नया जरिया
सरकार बस्तर में डेयरी क्रांति लाने की तैयारी कर रही है। आदिवासी परिवारों को दुधारू गाय और भैंस उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है, जिससे गांवों में नियमित आय का स्रोत विकसित हो सके। डेयरी केंद्र, दूध संग्रहण और परिवहन व्यवस्था के विस्तार से महिलाओं और युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
2 हजार करोड़ की सिंचाई परियोजनाएं, 32 हजार हेक्टेयर खेतों तक पहुंचेगा पानी
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत की दो बड़ी सिंचाई परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। इनके माध्यम से 32 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इंद्रावती क्षेत्र में सालभर पानी उपलब्ध होने से किसानों को धान के साथ सब्जी, फल और अन्य नकदी फसलों की खेती का अवसर मिलेगा।
36 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल बनेगी
बस्तर में स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ते हुए लगभग 36 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की जा रही है। इससे मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे तथा दूरस्थ क्षेत्रों में भी बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
सुरक्षा शिविर बनेंगे ‘सेवा डेरा’
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित करीब 200 सुरक्षा शिविरों को अब ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों के जरिए ग्रामीणों को राशन, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, बैंकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित 371 सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जाएगा।
चित्रकोट और सिरपुर को मिलेगा विश्वस्तरीय पर्यटन स्वरूप
सरकार बस्तर के Chitrakote Falls और Sirpur को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर टूरिज्म और जंगल सफारी जैसी गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
एआई, सेमीकंडक्टर और एजुकेशन सिटी पर भी फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में एआई मिशन, पर्यटन मिशन, खेल मिशन और स्टार्टअप-निपुण मिशन के जरिए नई अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। अबूझमाड़ और जगरगुंडा में 100 करोड़ रुपये की लागत से एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। वहीं 341 पीएमश्री स्कूल और 5,857 स्मार्ट क्लासरूम के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
नक्सलवाद से विकास मॉडल तक: बस्तर की नई कहानी
नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री का संदेश स्पष्ट रहा कि जो बस्तर कभी नक्सल हिंसा की वजह से सुर्खियों में रहता था, अब वही क्षेत्र कृषि, पर्यटन, डेयरी, शिक्षा और तकनीक आधारित विकास का नया मॉडल बनने की ओर बढ़ रहा है। सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में बस्तर की पहचान संघर्ष नहीं, बल्कि समृद्धि और अवसरों के केंद्र के रूप में स्थापित होगी।
